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घने जंगलों का फायदा उठाकर जुआरी सजा रहे अपनी महफ़िल, जनता को मामूल पर पुलिस अनजान उठ रहा सवाल

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धमतरी जिले के नगरी क्षेत्र के जंगलों में अवैध रूप से जुए के फड़ संचालित होने की खबर आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सुनसान और दुर्गम इलाकों का फायदा उठाकर कुछ लोग नियमित रूप से जुए का संचालन कर रहे हैं, जिससे कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, जंगलों में लगने वाले इन जुए के फड़ों में दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। इससे असामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ युवाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और पुलिस से ऐसे अवैध अड्डों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अवैध जुआ किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शिकायत मिलने पर संबंधित स्थानों पर नियमित गश्त और छापेमारी की जा रही है। यदि कहीं जुए का फड़ संचालित होने की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्रचलित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय लोगों ने जंगल क्षेत्रों में पुलिस की निगरानी बढ़ाने और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने की मांग की है, ताकि क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था बनी रहे। धमतरी जिले नगरी-सिहावा व केरेगांव क्षेत्र के जंगलों में बड़े पैमाने पर जुए का फड़ संचालित होने के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, शातिर संचालक रोजाना जंगलों में अलग-अलग स्थान बदलकर जुए का संचालन कर रहा है, जिससे पुलिस की नजर से बचा जा सके, और क्षेत्र में हो रहे इस खेल की भनक न लग सके,संचालक द्वारा विशेष रणनीति अपनाते हुवे खिलाड़ियों को लाने-ले जाने के लिए वाहनों का उपयोग किया जा रहा है। सूत्र बताते है कि खिलाड़ियों से एक हजार रुपये प्रवेश शुल्क और जीत की राशि पर 10 प्रतिशत तक नाल (कमीशन) लिया जाता है।

सूत्रों के मुताबिक, धमतरी, कुरूद, भाखरा, मगरलोड, गरियाबंद और बालोद क्षेत्र से रोजाना 40 से 50 जुआरियों को वाहनों से जंगल तक लाया जाता है। यह भी दावा किया जा रहा है कि रास्ते में खिलाड़ियों के मोबाइल फोन बंद करा दिए जाते हैं, ताकि जुए के फड़ की लोकेशन किसी तक न पहुंच सके जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब 12 बजे से खिलाड़ियों को एकत्र किया जाता है और दोपहर से देर शाम तक लाखों रुपये का दांव लगाए जा रहे ।

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